
नर-नारी का संबंध , सदैव ही शारीरिक ,सांस्कृतिक और भावनात्मक लेंस से देखा जाता रहा है।
मुझे ऐसा लगता है कि एक सच्चा प्रेम , मात्र सृजन ही नही करता अपितु आध्यात्मिक पूर्णत्व भी देता है।
शब्द का अर्थ
मेरे शब्दों का अर्थ हो तुम ,
तुमसे ही भाव पनपते हैं ।
मेरे जीवन का कथ्य हो तुम ,
तुमसे ही राग सवंरते हैं ।।
मोह भरी नकली दुनिया में ,
झूठ फरेबी शक़्ली दुनिया में ,
मेरे जीवन का सत्य हो तुम ,
ईश्वर का शाश्वत पथ्य हो तुम ।।
मैं वीणा , उसका बहता सुर हो तुम ।
मैं मरु-हृदय , पय स्त्रोत प्रचुर हो तुम ।।
मैं कृष्ण तत्व , हूँ कंस विनाशक ।
राधिका रूपी मृदु प्रेमत्व हो तुम ।।
मैं रुद्र गरल, सृष्टि का संहारक ।
जननी , रचयिता मातृत्व हो तुम ।।
मैं , हो पाया पूर्ण जिससे ,
ऐसा पावन पूर्णत्व हो तुम ।।
मेरे जीवन का तत्व हो तुम।।
मेरा आधा अस्तित्व हो तुम ।।
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बहुत सुंदर रचना 👏 ” शब्द का अर्थ”👏
awesome lies sir👌
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“स्त्री की चेतना, वेदना ,संवेदना… सब तुमसे हैl”
जब वह प्रेम में परिपूर्ण होती है.. वह रचयिता /सृजनकरता है… l”
“तुम शब्द …वहअर्थ है”
🌹
Instead of searching ardhnarishwar in temples,we should understand that they exist in each couple who is spiritually evolved.
Rgds
Meenu Garg Nandi
Founder,Truneek Informatics