
कहते हैं कि थोड़ा ऊंचा सोचना चाहिए और चीजो को broad vision ( वृहत्तर दृष्टि ) से देखना चाहिए । कुछ दिन पहले वायुयान से यात्रा कर रहा था , सहसा विचार आया कि मनुष्य कितनी चीजो को भूल गया है । फ्लैट कल्चर ने हमे संकीर्ण बना दिया है , हम भूल गए हैं कि मानव की मूल प्रवत्ति यायावर की है।
कार्ल सागन के शब्दों में ..We are a species of wanderers .
कविता का भाव यही है कि हम यह पहचाने की हम कोई साधारण वस्तु नही हैं , हम प्रकृति के सबसे असाधारण शिल्प हैं , रूमी ने जैसा कहा “we are a universe in motion ” और जैसा खगोल विज्ञानी कहते हैं कि “we are made of stardust ” .
हे वायुयान , क्या सिखाते हो तुम ।
विस्तार धरा का या संकीर्णता मानव मन की ।
या याद दिलाते हो मनुज को तुम ।
भ्रम उसके सीमित अस्तित्व का , भंगुरता उसके तन की ।।
हे वायुयान , क्या यह भी सिखाते हो तुम ।
कि क्यों खोया मनुष्य निज स्वार्थो में
घर गाड़ी धन स्वार्थ रूपी अनर्थो में ।
क्या ये भी बतलाते तुम ,
की 3 कमरे के फ्लैट की दुनिया बिंदु मात्र है ,
मनुष्य की मानवता तो विश्व सिंधु की पात्र है ।
हे वायुयान , क्या सिखाते हो तुम ?
कि सीधी राह पर भी ताकत लगा कर चलने से ,
उठ सकता है मनुष्य धरा के पार ।
की नही जरूरी धूर्त सीढ़ियां ओर चोरी की रस्सियां ,
व्यक्ति को ले जाने हेतु ऊंचे प्राचार ।।
हे वायुयान ।
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